Saturday, April 28, 2018

शिक्षा, सियासत और भविष्य की चिंता

यूपी में अब  8वी क्लास तक के पाठ्यक्रम में हिंदुत्व के सरोकारों, सांस्कृतिक विरासत और संस्कृति के लिए जीवन समर्पित कर देने वाले महापुरुषों, संतों और स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में पढ़ाया जाएगा। 2018-19 के पाठ्यक्रम में 16 नए अध्याय शामिल किए गए हैं... इन अध्यायों के ज़रिये श्यामा प्रसाद मुखर्जी,दीनदयाल उपाध्याय और बाबा गोरखनाथ की जीवनी बच्चों तक पहुंचाई जाएगी...सरकार के इस फ़ैसले के बाद अब इस पर सियासत तेज़ हो गई है।

पढेगा इंडिया तो बढेगा इंडिया, ये नारा तो आपने सुना ही होगा....लेकिन उत्तरप्रदेश में अब सरकार इस नारे से एक कदम आगे बढाते हुए इस बात की भी चिंता कर रही है कि क्या पढ़ेगा इंडिया। जल्द ही यूपी में सरकार बेसिक शिक्षा में बदलाव की तैयारी कर रही है...जिसमें अब बच्चों को महापुरूषों की जीवनी पढाई जाएगी....जिन महापुरूषों कि पढाई बच्चे करेंगे उनमें बाबा गोरखनाथ, गंभीरनाथ, वीर योद्धा आल्हा और ऊदल, जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीन दयाल उपाध्याय समेत रानी अवंतीबाई शामिल हैं। बच्चों के लिए जल्द ही ‘हमारे महापुरूष ‘ किताब भी प्रकाशित जाएगी... हालांकि योगी सरकार के इस फ़ैसले पर  विपक्ष ने विरोध जता दिया है... .सामजवादी पार्टी की तरफ से नसीहत दी जा रही है कि पहले सरकार शिक्षा के स्तर में सुधार करें... तो वहीं कांग्रेस ने कहा की देश के भविष्य पर किसी भी विचारधारा को नहीं थोपना चाहिए। सरकार के फ़ैसले पर विपक्ष ने सवाल उठाए तो बीजेपी ने भी पलटवार कर दिया है.. बीजेपी  विपक्ष विरोध को संकीर्ण मानसिकता बता रही है। सिलेबस में बदलाव पर सियासत होना शुरू हो गई है. और वजह है संघ से जुड़े लोग और हिंदुत्व के प्रतीक रहे महापुरुषों को सिलबेस में पढ़ाया जाना.. विपक्ष को लगता है कि सरकार संघ के एजेंड़े पर काम कर रही है.. लेकिन बीजेपी की दलील है कि आखिर महापुरुषों के बारे में पढ़ाए जाने पर आपित्त क्यों है ?

No comments:

Post a Comment