Thursday, May 3, 2018

उत्तराखंड में नई आबकारी नीति पर बवाल


उत्तराखंड सरकार ने नई आबकारी नीति को हाल ही में मंजूरी दी थी और इसके तहत अब शराब की दुकानें खुल रही हैं, लेकिन इसका विरोध शुरू हो गया है। नई शराब पर नीति जहां पहले विपक्ष सवाल उठा रहा था तो अब आम लोग भी इसके विरोध में उतर आए हैं। लोगों के मुताबिक, नई आबकारी नीति के ज़रिए जगह-जगह अब गांव और शहरों में की दुकानें खोली जा रही हैं। इतना ही नहीं, अब लोग सड़कों पर उतर कर विरोध करने लगे हैं। ऋषिकेश में ऐसी ही तस्वीर देखने को मिली, जहां शराब की दुकान खुलने का विरोध किया गया। वहीं, पौड़ी और टिहरी ज़िले में भी दुकान खोले जाने का विरोध तेज़ हो गया है। लोगों के मुताबिक, शराब की दुकानें नियमों की अनदेखी कर कहीं स्कूल तो कहीं मंदिर के नजदीक तक खोली जा रही है। शराब की दुकानों को लेकर सवाल विपक्ष और जनता ही नहीं, बल्कि अब सरकार में महिला बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने भी उठा दिए हैं.. रेखा आर्य के मुताबिक लोगों का विरोध जायज हैं..वहीं  देवप्रयाग से बीजेपी विधायक विनोद कण्डारी भी लोगों के विरोध के सही मान रहे हैं। सरकार की मंत्री ने ही सवाल खडे किए तो कांग्रेस को और घेरने के मौका मिल गया.. कांग्रेस का आरोप है कि सरकार शराब के मुद्दे पर बिल्कुल भी गंभीर नहीं हैं। 

हाल ही में सरकार ने नई आबाकरी नीति को मंजूरी दी थी, जहां शराब के ठेकों का आवंटन ई-नीलामी के माध्यम से करने का फ़ैसला हुआ। इतना ही नहीं, अधिक राजस्व के लिए शराब दुकानों का ठेका चार के समूह को भी मंजूरी दी गई। इसकी वजह से अब राज्य में जगह-जगह शराब की दुकानें खुल रही हैं और इसी का लोग विरोध कर रहे हैं।

यूपी की सियासत में जिन्ना का 'जिन्न'


अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के यूनियन हॉल में मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर लगी होने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इसको लेकर एएमयू में छात्रों का हंगामा जारी है। बाब ए सैयद गेट पर छात्रों ने फिर पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।  हालात को देखते हुए AMU को 5 दिन के लिए बंद कर दिया गया है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।



अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जिन्ना की तस्वीर पर जंग जारी है....तनाव बढ़ने के बाद यूनिवर्सिटी की गेट पर PAC तैनात कर दी गई है...यूनिवर्सिटी बंद है....कई जिलों के थानेदार और CO को अलीगढ़ बुला लिया गया है...दरअसल....बुधवार को जिन्ना की तस्वीर हटाने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के बाद यहां माहौल तनावपूर्ण है....यहां हंगामे को देखते हुए सुरक्षा के लिए RAF की दो कंपनी तैनात की गई है...कई हिंदू संगठनों ने अल्टीमेटम दिया है कि अगर 24 घंटे में एएमयू से जिन्ना की तस्वीर नहीं हटाई जाती तो पूरे देश में प्रदर्शन होगा।

इससे पहले, बुधवार को अलीगढ़ में जमकर हंगामा हुआ....हिंदूवादी संगठनों ने बुधवार को एएमयू के सामने प्रदर्शन किया...पुलिस ने हंगामा  कर रहे लोगों को लाठीचार्ज किया...लाठीचार्ज और हंगामे में 15 से ज्यादा लोग घायल हो गए...घायलों को अस्पताल में दाखिल कराया गया है।

बड़ी बात ये कि AMU में जिन्ना की तस्वीर के समर्थन में  जामिया मिलिया इस्लामिया के वाइस चांसलर भी आ गए हैं...  तलत अहमद का कहना है कि यूनिवर्सिटी में काफी पहले से तस्वीर लगी थी ... ऐसे में इसे अचानक हटाना सही नहीं है।

देश का बंटवारे करने वाले जिन्ना का जिन्न फिर से बाहर निकल आया है.. जिसकी वजह से अलीगढ़ में तनाव का माहौल बना हुआ है.. लेकिन सवाल ये है कि जिस शख्स को देश में कलंक माना जा रहा है.. आख़िर उसकी तस्वीर हटाने पर ऐतराज है क्यों..? और क्यों एक पाकिस्तानी को लेकर देश को जलाने की कोशिश हो रही है?

Monday, April 30, 2018

आज़ादी के 70 साल बाद अंधेरे में डूबा एक गांव

बिजली सबकी ज़रूरत है और आधुनिक युग में बिजली की ज़रूरत सबको रहती है। लेकिन, यूपी के हाथरस जिले के विकासखंड सासनी के गांव नगला घना के गांववालों को आजादी के बाद से अब तक बिजली के दर्शन नहीं हुए हैं। इस गांव के लोग दिए की रौशनी से छुटकारे को तरस रहे हैं। अलबत्ता, बिजली विभाग के अधिकारी 30 जून तक गांव का विद्युतीकरण कराने की बात कह रहे है। 



हाथरस जिले के विकासखंड सासनी के गांव नगला घना गांव में बिजली के खम्भे तो गड़े हैं, लेकिन उन पर बिजली की लाइन अभी तक नहीं है। गांव में बिजली न होने से ग्रामीण बेहद परेशान है। ये ग्रामीण बिजली विभाग के खिलाफ गुस्से में हैं। इस गांव में आजादी के बाद से अब तक बिजली नहीं पंहुची है। ग्रामीणों की पीड़ा ये है कि उनके साथ आखिर ऐसा भेदभाव क्यों? गांव के बच्चे, बूढ़े और जवान सभी को अंधेरे में रहने का दर्द है। बच्चे रात में पढ़ाई न होने और टीवी न देख पाने की बात कह रहे हैं। बूढ़े अंधेरे में गिर जाने की, तो जवान लोग जानना चाहते हैं कि ऐसा भेदभाव उनके साथ क्यों है। ग्रामीणों की मानें तो उनके गांव में विवाह, शादी के कार्यक्रम जनरेटर लगाकर होते हैं और उनके बच्चे बिजली न होने से पढ़ाई में पिछड़ गए हैं। ग्रामीणों का कहना तो ये भी है कि उनके यहां सात-आठ महीने पहले खम्भे गड़े हैं, लेकिन लाइन नहीं बनी है। 

गांव नगला घना में बिजली के न होने की जानकारी गांव के प्रधान से लेकर बिजली विभाग के अधिकारीयों को भी है। गांववाले गांव में बिजली न होने के लिए गांव के प्रधानों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। लेकिन, मौजूदा प्रधान का कहना है कि गांव में बिजली के खम्भे गड़ चुके हैं, पर लाइन अभी नहीं खिची है। बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस गांव के विद्युतीकरण का कार्य प्रगति पर है। अनुबंध के अनुसार, एजेंसी को 30 जून तक कार्य पूर्ण करना है। 

बहरहाल, तमाम दावों के बीच गांव नगला घना में अभी तक बिजली न आने की ये कड़वी सच्चाई है। आवश्यकता इस बात की है कि इस गांव का अँधेरा भी दूर हो। 

भ्रष्ट अफसरों पर सख़्त यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ


सीएम योगी ने रिश्वतखोर अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं....सीएम योगी ने ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों की संपत्ति भी ईडी की सहायता से जब्त करने के आदेश दिए हैं...ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सीएम के इस निर्देश के बाद प्रदेश में भ्रष्टाचार कम होगा?



सूबे में रिश्वतखोरी को लेकर सीएम योगी अब फुल एक्शन में आ गए हैं...रिश्वतखोर अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्देश जारी कर सीएम ने संदेश दे दिया है...कि कोई भी छोड़ा नहीं जाएगा...कोई भी अधिकारी और कर्मचारी रिश्वतखोरी में शामिल पाया गया...तो कार्रवाई होगी..इतना ही नहीं ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों की संपत्ति ईडी की मदद से जब्त करने के आदेश भी दिए गए।

इतना ही नहीं, जनता ऐसे रिश्तखोर अधिकारियों और कर्मचारियों की शिकायत भी कर सके...इसके लिए सभी जिलों के डीएम को फोन नंबर जारी करने को कहा गया गया...जिस नंबर पर शिकायत की जा सके..। वहीं सीएम की रिश्तखोरी पर सख्ती को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार रिश्तखोरी पर सख्त होने की बात तो कर रही है...लेकिन रिश्वतखोरी रूक नहीं रही है

सीएम के रिश्वतखोरी पर कड़े तेवर और कार्रवाई से अफसरों को संदेश तो दिया गया है..लेकिन सवाल है कि सूबे में रिश्वतखोरी के इस मकड़जाल को सरकार कैसे साफ़ कर पाएगी...क्योंकि सूबे में रिश्वतखोरी के मर्ज से कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों तक कोई बचा नहीं है.....ऐसे में सरकार को चाहिए कि कोई ऐसी दवा लेकर आए...जिसकी मदद से इस मर्ज को इलाज किया जा सके।

Sunday, April 29, 2018

खुल गए कपाट....चलो केदारनाथ

केदारनाथ धाम के कपाट रविवार सुबह 6.15 बजे विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। पहले ही दिन श्रद्धालुओं की संख्या ने रिकार्ड तोड़ दिया। केदारनाथ आपदा के बाद 5 हजार से ज्यादा श्रद्धालु कपाट खुलने के दौरान मौजूद रहे। सुबह से ही केदारनाथ धाम में बम-बम भोले और बाबा केदारनाथ के जयकारे गूंजे।
रविवार को तड़के चार बजे मंदिर के कपाट खुलने की प्रक्रिया शुरू हुई। सबसे पहले बाबा केदार की चल विग्रह उत्सव डोली को मंदिर में प्रवेश कराया गया। इसके बाद रावल और पुजारी मंदिर के भीतर गए और धार्मिक अनुष्ठान शुरू किया। गर्भगृह में विधिवत पूजा-अर्चना शुरू हुई। रुद्राभिषेक, जलाभिषेक समेत सभी धार्मिक अनुष्ठान विविधत संपन्न कराने के बाद ठीक सवा छह बजे मंदिर के कपाट भक्तों के दर्शनार्थ खोल दिए गए। आपको बता दें, केदारनाथ भगवान आशुतोष के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है।

बदला नजर आएगा केदारनाथ धाम
वे श्रद्धालु जो पहले भी केदारनाथ धाम के दर्शन के लिए आते रहे हैं, उन्हें इस बार मंदिर परिसर कुछ अलग नजर आएगा। सरकार ने केदारनाथ धाम के प्रवेश मार्ग को विशेष रूप से सुसज्जित कराया गया है, जिसकी केदार धाम से दूरी 273 मीटर की है। 20 अक्टूबर 2017 को पीएम नरेंद्र मोदी ने केदारनाथ में 650 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास किया था। इसके ज़रिए केदारनाथ धाम को भव्य रूप देने की कोशिश की गई है।

इस बार टूट सकते हैं सभी पुराने रिकार्ड
उत्तराखंड सरकार इस बात की उम्मीद जता रही है कि इस बार श्रद्धालुओं का आंकड़ा 30 लाख तक पहुंच सकता है। जून- 2013 की आपदा के बाद यात्रियों की संख्या का रिकॉर्ड इस बार टूटने की उम्मीद है।

एक लाख से ज्यादा यात्री करा चुके हैं रजिस्ट्रेशन
आपदा से केदारनाथ यात्रा प्रभावित हुई थी। लेकिन, इस बार यात्रा को लेकर भारी उत्साह नजर आ रहा है। 25 अप्रैल तक केदारनाथ के लिए एक लाख 10 हजार यात्री ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं।  कपाट खुलने के दिन केदारनाथ धाम में पांच हजार से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे। 2013 की आपदा के बाद ये पहला मौका है जब कपाट खुलने के दिन इतनी संख्या में यात्री केदारनाथ पहुंचे।

4 साल के बच्चे की मां बनी यूपीएससी की सेकंड टॉपर

हरियाणा की बेटियां खेल के मैदान पर जीत का परचम लहराती रही हैं। कुछ दिनों पहले मिस वर्ल्ड का खिताब जीतकर मानुषी छिल्लर ने सौंदर्य प्रतियोगिता में हरियाणा का जलवा दिखाया। लेकिन, इस बार यूपीएससी की परीक्षा में बड़ी कामयाबी हासिल कर एक बेटी ने ये दिखा दिया है कि हरियाणा पढ़ाई के क्षेत्र में भी किसी से कम नहीं है। यूपीएससी एग्जाम में दूसरा पायदान हासिल करने वाली सोनीपत के अनु कुमारी की कहानी इस बात की सबसे बड़ी मिसाल है। 
अनु के परिवार में इन दिनों खुशी का माहौल है। क्योंकि, उन्होंने न सिर्फ परिवार और गांव का नाम रौशन किया है, बल्कि पूरे देश में सम्मानित मानी जाने वाली यूपीएससी की परीक्षा में हरियाणा का डंका बजा दिया है...आधी आबादी की प्रेरणा बनी हरियाणा की इस छोरी ने  यूपीएससी एग्जाम में कामयाबी का झंडा गाड़ दिया है और सेकेंड टॉपर बन गई। सालों से आईएसएस बनने का सपना देख रही अनु कुमारी के पांव यूपीएससी के नतीजे आने के बाद से ज़मीन पर नहीं हैं...आईएएस बनकर वो आधी आबादी को ताकत देना चाहती है...महिलाओं को सशक्त बनाने की मुहिम चलाना चाहती हैं। 
अनु कहती हैं कि उनकी कामयाबी का राज़ उनकी मेहनत है...पिछले एक साल से वो रोजाना दस से बारह घंटे तक पढ़ाई में डूबी रहीं...पढ़ाई की खातिर कई छोटी-बड़ी खुशियों की कुर्बानी दी। अनु अपनी कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता को देती हैं। सोनीपत के शिवा स्कूल से मैट्रिक पास करने वाली अनु ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से फिजिक्स में ऑनर्स किया और फिर नागपुर आईएमटी से एमबीए की डिग्री ली...इस बीच अनु की शादी भी हो गई..और वो चार साल के बच्चे की मां भी है..लेकिन, पढ़ाई के प्रति जुनून ने पति और ससुरालवालों को भी अनु का कायल बना दिया...हर कोई अनु के सपने का साथी बन गया...यही वजह है कि बच्चे के पालन पोषण और नौ साल तक नौकरी करने के बावजूद अनु के जज्बे में कोई कमी नहीं आई...और आखिरकार वो दिन भी आया, जिस दिन उनके सपनों की उड़ान ने मंजिल को छू लिया।

Saturday, April 28, 2018

चला 'गधा' तहसीलदार बनने

मूर्खता या बेवकूफी को लेकर जब भी चर्चा होती है तो जेहन में गदहे का चेहरा घूम जाता है। हिंदी भाषा में गधा एक तरह से मूर्खता का पर्याय बन गया है। लेकिन, जम्मू कश्मीर में एक गदहे ने ऐसे काम किया है जिसे लेकर सोशल मीडिया में खूब चर्चा हो रही है...यहां एक गधा नायब तहसीलदार पद के लिए उम्मीदवार बना है।

नाम- कचुर खार
पिता का नाम- क्रिहून खार
जन्म तिथि- 1 जनवरी 1990
उम्मीदवार- नायब तहसीलदार
तस्वीर- भूरे गधे यानी कचुर खार की

कागज के टुकड़े पर एक गधे के ये परिचय कोई मज़ाक नहीं...और ना ही ये गधे की तारीफ में किसी कहानी या कविता का हिस्सा है। बल्कि, जिस कागज पर गधे का नाम पता और परिचय दर्ज है, उस कागज को जम्मू कश्मीर सर्विसेस सलेक्शन बोर्ड ने जारी किया है। 29 अप्रैल यानी रविवार को जम्मू कश्मीर सर्विसेस सलेक्शन बोर्ड की नायब तहसीलदार पद के लिए परीक्षा आयोजित है...परीक्षा में बैठने के लिए दूसरे उम्मीदवारों के साथ ही कचुर खार यानी भूरे गधे के नाम से भी एडमिट कार्ड जारी किया गया है।

एडमिट कार्ड में बाकायदा भूरे गधे का नाम..पता..और उसका परीक्षा सेंटर दर्ज है। दूसरे उम्मीदवारों की तरह ही एडमिट कार्ड में गधे का स्कैन्ड सिग्नेचर तक दिख रहा है। लेकिन इस पर गधे की तस्वीर नहीं होती...तो शायद किसी को इस गड़बड़झाले का पता नहीं चलता।

नायब तहसीलदार जैसे प्रतिष्ठित पद के लिए एडमिट जारी करने में जम्मू कश्मीर सर्विसेस सलेक्शन बोर्ड की ये लापरवाही अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। हैरानी की बात है कि इस फर्जी एडमिट कार्ड में बोर्ड के सेक्रेटरी का दस्तखत भी है...हालांकि हजारों की संख्या में जारी होने वाले ऐसे एडमिट कार्ड कंप्यूटर के जरिए ऑनलाइन जारी किए जाते हैं...। लेकिन, मशीनों पर निर्भरता इतनी बढ़ गई कि राज्य सलेक्शन बोर्ड इंसान और जानवर में फर्क तक भूल गया।

वैसे ये पहला मौका नहीं है...जब जम्मू कश्मीर में ऐसी बड़ी लापरवाही सामने आई हो। इससे पहले साल 2015 जम्मू कश्मीर बोर्ड ऑफ प्रोफेशनल एंट्रेंस परीक्षा के दौरान एक गाय के लिए एडमिट कार्ड जारी किया गया था। उस एडमिट कार्ड में गाय का नाम काचिर गाव बताया गया था और गुरा दंड नाम के एक सांड को उसका पिता बताया गया था। लेकिन उस घटना के बाद भी सरकारी तंत्र ने सबक नहीं सीखा...और अब ये नया मामला जम्मू कश्मीर सर्विसेस सलेक्शन बोर्ड की सोशल मीडिया में किरकिरी करा रहा है।

शिक्षा, सियासत और भविष्य की चिंता

यूपी में अब  8वी क्लास तक के पाठ्यक्रम में हिंदुत्व के सरोकारों, सांस्कृतिक विरासत और संस्कृति के लिए जीवन समर्पित कर देने वाले महापुरुषों, संतों और स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में पढ़ाया जाएगा। 2018-19 के पाठ्यक्रम में 16 नए अध्याय शामिल किए गए हैं... इन अध्यायों के ज़रिये श्यामा प्रसाद मुखर्जी,दीनदयाल उपाध्याय और बाबा गोरखनाथ की जीवनी बच्चों तक पहुंचाई जाएगी...सरकार के इस फ़ैसले के बाद अब इस पर सियासत तेज़ हो गई है।

पढेगा इंडिया तो बढेगा इंडिया, ये नारा तो आपने सुना ही होगा....लेकिन उत्तरप्रदेश में अब सरकार इस नारे से एक कदम आगे बढाते हुए इस बात की भी चिंता कर रही है कि क्या पढ़ेगा इंडिया। जल्द ही यूपी में सरकार बेसिक शिक्षा में बदलाव की तैयारी कर रही है...जिसमें अब बच्चों को महापुरूषों की जीवनी पढाई जाएगी....जिन महापुरूषों कि पढाई बच्चे करेंगे उनमें बाबा गोरखनाथ, गंभीरनाथ, वीर योद्धा आल्हा और ऊदल, जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीन दयाल उपाध्याय समेत रानी अवंतीबाई शामिल हैं। बच्चों के लिए जल्द ही ‘हमारे महापुरूष ‘ किताब भी प्रकाशित जाएगी... हालांकि योगी सरकार के इस फ़ैसले पर  विपक्ष ने विरोध जता दिया है... .सामजवादी पार्टी की तरफ से नसीहत दी जा रही है कि पहले सरकार शिक्षा के स्तर में सुधार करें... तो वहीं कांग्रेस ने कहा की देश के भविष्य पर किसी भी विचारधारा को नहीं थोपना चाहिए। सरकार के फ़ैसले पर विपक्ष ने सवाल उठाए तो बीजेपी ने भी पलटवार कर दिया है.. बीजेपी  विपक्ष विरोध को संकीर्ण मानसिकता बता रही है। सिलेबस में बदलाव पर सियासत होना शुरू हो गई है. और वजह है संघ से जुड़े लोग और हिंदुत्व के प्रतीक रहे महापुरुषों को सिलबेस में पढ़ाया जाना.. विपक्ष को लगता है कि सरकार संघ के एजेंड़े पर काम कर रही है.. लेकिन बीजेपी की दलील है कि आखिर महापुरुषों के बारे में पढ़ाए जाने पर आपित्त क्यों है ?